Wednesday, 8 July 2015

धोखा ना देना कि...

धोखा ना देना कि तुझपे ऐतबार बहुत है;
ये दिल तेरी चाहत का तलबगार बहुत है;
तेरी सूरत ना दिखे तो दिखाई कुछ नही देता;
हम क्या करें कि तुझसे हमें प्यार बहुत है।

तन्हाइयों में ..

तन्हाइयों में मुस्कुराना इश्क़ है;
एक बात को सब से छुपाना इश्क़ है;
यूँ तो नींद नहीं आती हमें रात भर;
मगर सोते-सोते जागना और जागते-जागते सोना ही इश्क़ है।

धोखा ना देना कि...

धोखा ना देना कि तुझपे ऐतबार बहुत है;
ये दिल तेरी चाहत का तलबगार बहुत है;
तेरी सूरत ना दिखे तो दिखाई कुछ नही देता;
हम क्या करें कि तुझसे हमें प्यार बहुत है।

जज़्बात मचलते हैं...

जज़्बात मचलते हैं जब तुमसे मिलता हूँ;
अरमान मचलते हैं जब तुमसे मिलता हूँ;
साथ हम दोनों का कोई बर्दाश्त नहीं करता;
जलती है देख कर दुनिया जब मैं तुमसे मिलता हूँ।

ये दिल भुलाता नहीं..

ये दिल भुलाता नहीं है मोहब्बतें उसकी;
पड़ी हुई थी मुझे कितनी आदतें उसकी;
ये मेरा सारा सफर उसकी खुशबू में कटा;
मुझे तो राह दिखाती थी चाहतें उसकी।

उनके दीदार के लिए ..

उनके दीदार के लिए दिल तड़पता है;
उनके इंतज़ार में दिल तरसता है;
क्या कहें इस कमबख्त दिल को अब;
अपना होकर भी जो किसी और के लिए धड़कता है।

दर्द देने का अंदाज....

दर्द देने का अंदाज कुछ ऐसा है
दर्द दे कर कहते है अब हाल कैसा है
ज़हर दे कर कहते है अब पीना होगा
जब पी लिए तो कहते है अब जीना होगा !

खामोश पलकों से जब...

खामोश पलकों से जब आंशु आते है
आप क्या जाने की आप कितने याद आते है
आज भी उस मोड़ पे खड़े है,
जहा आपने कहा था ठहरो हम अभी आते है

दिल ने कहा ...

दिल ने कहा याद करते रहना,
मन ही मन बात करते रहना,
वो हमारे दिल की फरियाद सुने ना सुने,
अपना तो फ़र्ज़ है उन्हे याद करते रहना.

सपनो की दुनिया...

सपनो की दुनिया में हम खोते चले गए
होश में थे मगर मदहोश होते चले गए
जाने क्या बात थी उनकी आवाज़ में
न चाहते हुए भी उनके होते चले गए

अपने दिल को पत्थर ...

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना। 

सोचा था की वो...

सोचा था की वो मेरी ज़िन्दगी है
प्यारा सा ख्वाब और बंदगी है
ये सोचकर उसपे सब कुछ लुटाया है, और
वो पूछते है की तू मेरी क्या लगती है 

वो दर्द ही क्या....

वो दर्द ही क्या जो आँखों से बह जाए!
वो खुशी ही क्या जो होठों पर रह जाए!
कभी तो समझो मेरी खामोशी को!
वो बात ही क्या जो लफ्ज़ आसानी से कह जायें!

अपने दिल को पत्थर ...

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना।